श्री भैरव जी की अष्टमी: वैदिक सनातन धर्म में उनका महत्त्व और उपासना का महत्व

भैरव जी का महत्त्वभगवान भैरव, जिन्हें “काल भैरव” या “महाकाल भैरव” के नाम से भी जाना जाता है,

भैरव अष्टमी, जिसे काल भैरव जयंती भी कहा जाता है, 2024 में 22 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा और व्रत का विशेष महत्व है।

Timing

22 Nov -23rd Nov, 2024 is Bhairav Ashtami 🕉 Ashtami Tithi Begins – November 22, 2024 – 06:07 PM Ashtami Tithi Ends – November 23, 2024 – 07:56 PM

हिंदू धर्म में एक अत्यंत शक्तिशाली और पूजनीय देवता हैं। वे भगवान शिव के रौद्र रूप हैं, जो धर्म, न्याय और सच्चाई के रक्षक माने जाते हैं।

उनका स्वरूप साहस, शक्ति और भय से मुक्ति का प्रतीक है।भैरव जी का आध्यात्मिक महत्त्व:

1. संकटों का निवारण:भैरव जी की पूजा से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और भय दूर होता है। उनके भक्तों को जीवन में साहस और आत्मविश्वास मिलता है।

2. काल के अधिपति:भैरव जी को समय (काल) का स्वामी माना जाता है। उनकी आराधना से व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है।

3. शत्रु नाशक:उनकी कृपा से शत्रुओं का नाश होता है और व्यक्ति के जीवन में शांति और संतुलन आता है।

4. तंत्र साधना और रहस्यवाद:भैरव जी को तंत्र साधना और रहस्यवाद का अधिपति माना जाता है। तांत्रिक विधियों में उनकी उपासना से सिद्धियां प्राप्त की जाती हैं।

5. धर्म और न्याय के संरक्षक:भगवान भैरव धर्म और न्याय के रक्षक हैं। उनका आशीर्वाद सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों के साथ हमेशा रहता है।

जीवन में भैरव जी की उपासना का लाभजीवन के हर संकट का समाधान मिलता है।

धन, संपत्ति और समृद्धि का आगमन होता है।मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति होती है।

नकारात्मक ऊर्जाओं और बाधाओं से सुरक्षा मिलती है।

भैरव जी के भक्त उनकी उपासना विशेष रूप से भैरव अष्टमी, भैरव जयंती और प्रदोष काल में करते हैं।

उनकी आराधना से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भक्त को जीवन के हर क्षेत्र में विजय मिलती है।जय श्री भैरव!

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